Monday, July 29, 2013

"माँ"


































"माँ"
 

बिन कोई स्वार्थ रखे, जो हमेंशा तुम्हारा साथ दे, वो है 'माँ'
तुम्हें आगे बढ़ते देख, जिसकी ख़ुशी की कोई सीमा ना रहे, वो है 'माँ'
जो घर में ममता और प्रेम की डोर से सारे परिवार को संजो के रखे, वो है 'माँ'
तुम्हारे मित्रों को जो प्रेमपूर्वक अपनाए और उन्हें महत्ता दे, वो है 'माँ'
तुम्हारी खिलखिलाती हंसी को जो बरकरार रखे, वो है 'माँ'
तुम्हारे गम में अमर आशाओं को जो सदैव जागृत करे, वो है 'माँ'
अंतरमन का सबसे सुन्दर रूप जो दर्शाए, वो है माँ

ऐसी है मेरी, तुम्हारी और हम सबकी माँ
माँ के तो क्या कहने, क्यूंकि....
जो साक्षात् आदिशक्ति का अंश हैं, वो हैं 'माँ'

- नानकी नाथ
दिनांक: २७-७-२०१३
स्थान: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई, भारत

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